यूँ तो तेरी राह में
सारी उम्र बिछा दी मैंने,
पर मेरे शहर जो आती थी
हर वो राह जला दी मैंने..
तू मेरा ना बन पाया
पर उनका तो हो जाए,
तेरे चाहने वालों को
दिल से ये दुआ दी मैंने..
तोड़ दी झूठे वादों
और कसमों की सब ज़ंजीरें
चुन चुन कर सब कड़ियाँ
गंगा में बहा दी मैंने ...
सारा शहर जला देने की
साजिश जब ये कर बैठी,
जलते हुए इस दीपक की
बढती लौ बुझा दी मैंने...
सारी उम्र बिछा दी मैंने,
पर मेरे शहर जो आती थी
हर वो राह जला दी मैंने..
तू मेरा ना बन पाया
पर उनका तो हो जाए,
तेरे चाहने वालों को
दिल से ये दुआ दी मैंने..
तोड़ दी झूठे वादों
और कसमों की सब ज़ंजीरें
चुन चुन कर सब कड़ियाँ
गंगा में बहा दी मैंने ...
सारा शहर जला देने की
साजिश जब ये कर बैठी,
जलते हुए इस दीपक की
बढती लौ बुझा दी मैंने...
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